धातुओं के रूप पाँच लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) में: तीन पुरुष, तीन वचन, परस्मैपद, आत्मनेपद और उभयपद।
| पठ्, लट् (प्रथम; मध्यम; उत्तम) | पठति पठतः पठन्ति; पठसि पठथः पठथ; पठामि पठावः पठामः |
| पठ्, लृट् | पठिष्यति पठिष्यतः पठिष्यन्ति; पठिष्यसि पठिष्यथः पठिष्यथ; पठिष्यामि पठिष्यावः पठिष्यामः |
| पठ्, लङ् | अपठत् अपठताम् अपठन्; अपठः अपठतम् अपठत; अपठम् अपठाव अपठाम |
| पठ्, लोट् | पठतु पठताम् पठन्तु; पठ पठतम् पठत; पठानि पठाव पठाम |
| पठ्, विधिलिङ् | पठेत् पठेताम् पठेयुः; पठेः पठेतम् पठेत; पठेयम् पठेव पठेम |
| लभ्, लट् (आत्मनेपद) | लभते लभेते लभन्ते; लभसे लभेथे लभध्वे; लभे लभावहे लभामहे |
| अस्, लट् | अस्ति स्तः सन्ति; असि स्थः स्थ; अस्मि स्वः स्मः |
| कृ, लट् | करोति कुरुतः कुर्वन्ति; करोषि कुरुथः कुरुथ; करोमि कुर्वः कुर्मः |
इस वाक्य की क्रिया को लङ् लकार में बदलकर लिखिए: ‘छात्रौ कार्यम् कुरुतः।’
Working: कृ, लङ् लकार, प्रथमपुरुष, द्विवचन
Answer: अकुरुताम्