Standard difficulty · 20 questions · 40 marks · Time: 49 minutes
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रचनात्मक लेखन · AW-11H-RCL-2026-V1 · For parents — fold back or tear off before handing the sheet to your child.
| Q | Answer | Working |
|---|---|---|
| 1 | (b) छोटे, स्वाभाविक और पात्रों के अनुकूल | — |
| 2 | (a) वह संदेश या अनुभव जो कहानी पाठक तक पहुँचाना चाहती है | — |
| 3 | (d) स्वाभाविक और प्रभावशाली, जो पाठक पर छाप छोड़े | — |
| 4 | (a) निबंध कई अनुच्छेदों में विस्तार पाता है, अनुच्छेद एक ही अनुच्छेद में सीमित होता है | — |
| 5 | (c) कहानी का स्थान, समय और परिवेश | — |
| 6 | (c) वर्तमान से हटकर अतीत की घटना दिखाना | — |
| 7 | (a) उपसंहार | ‘अंत में’, ‘अतः’, ‘निष्कर्षतः’ जैसे शब्द उपसंहार के संकेत हैं। |
| 8 | (b) उपसंहार | ‘अंत में’, ‘अतः’, ‘निष्कर्षतः’ जैसे शब्द उपसंहार के संकेत हैं। |
| 9 | नमूना: यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना नहीं, बल्कि नए अनुभवों की ओर एक कदम है। हर यात्रा हमें कुछ नया सिखाकर लौटाती है। | भूमिका संक्षिप्त हो, विषय का परिचय दे और रुचि जगाए। |
| 10 | नमूना: विज्ञान एक शक्ति है, जिसका परिणाम उसके उपयोग पर निर्भर करता है। यदि इसका प्रयोग विवेक और मानवता के साथ हो, तो यह सदा वरदान ही रहेगा। | उपसंहार में पूरे विषय का सार और कोई संदेश या संकल्प हो। |
| 11 | नमूना: भूख और बर्बादी का विरोधाभास; कारण; संसाधनों की हानि; उपाय; अन्न का सम्मान | बिंदु क्रम से हों: परिचय से निष्कर्ष तक। |
| 12 | नमूना: चौथी बार | शीर्षक छोटा, आकर्षक और कहानी के मूल भाव से जुड़ा हो। |
| 13 | संकट में धैर्य और सूझ-बूझ से काम लेने पर रास्ता मिल ही जाता है। | सीख कहानी की घटना से निकले। |
| 14 | डॉक्टर: आपको रोज़ आधा घंटा टहलना चाहिए। मरीज़: क्या मैं सुबह के समय टहल सकता हूँ, डॉक्टर साहब? | पात्रों के नाम, छोटे और स्वाभाविक संवाद; ज़रूरत हो तो कोष्ठक में हाव-भाव। |
| 15 | प्रधानाचार्य ने घोषणा की कि अगले सप्ताह विद्यालय में पुस्तक मेला लगेगा। एक छात्रा ने पूछा कि क्या विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें दान कर सकते हैं। | संवाद ‘कि’ के साथ वर्णन में बदलें; सर्वनाम और क्रियाएँ उसी अनुसार बदलें। |
| 16 | नमूना: पर्दा उठने में बस दो मिनट बचे थे। सना के हाथ ठंडे पड़ गए थे और वह अपने संवाद भूलती जा रही थी। उसने पर्दे की दरार से झाँका: सभागार खचाखच भरा था। | देशकाल का संकेत, पात्र का परिचय और कोई ऐसी घटना जो आगे पढ़ने की उत्सुकता जगाए। |
| 17 | आज हमारे जीवन का हर क्षण विज्ञान के चमत्कारों से घिरा है। बिजली ने रातों को रोशन किया है, तो चिकित्सा विज्ञान ने अनेक असाध्य रोगों का इलाज संभव बनाया है। टीकों ने करोड़ों जीवन बचाए हैं। मोबाइल और इंटरनेट ने दूरियाँ मिटा दी हैं, और रेल, बस तथा हवाई जहाज़ ने यात्रा को आसान बना दिया है। उपग्रह मौसम की भविष्यवाणी करके तूफ़ानों से पहले चेतावनी देते हैं। पर विज्ञान एक शक्ति है, जिसका दुरुपयोग विनाश भी ला सकता है। प्रदूषण और प्रकृति का दोहन इसके उदाहरण हैं। इसलिए विज्ञान का उपयोग विवेक और मानवता के साथ होना चाहिए, ताकि इसके चमत्कार सबके लिए वरदान बने रहें। | सभी संकेत बिंदु क्रम से आएँ; पहला वाक्य विषय का परिचय दे और अंतिम वाक्य निष्कर्ष; एक ही अनुच्छेद, बातें दोहराई न जाएँ। |
| 18 | छूटा हुआ बैग दोपहर में रामू की रिक्शा में बैठी एक युवती स्टेशन पर उतरते समय अपना बैग भूल गई। रामू ने बैग खोला तो उसमें नौकरी के साक्षात्कार के प्रमाण-पत्र थे। उसे याद आया कि युवती किसी दफ़्तर का नाम ले रही थी। वह अपनी दिन भर की कमाई की परवाह किए बिना उस दफ़्तर की ओर चल पड़ा। वहाँ युवती घबराई हुई खड़ी थी, क्योंकि प्रमाण-पत्रों के बिना उसका साक्षात्कार नहीं हो सकता था। बैग देखते ही उसकी आँखें भर आईं। उसने रामू को पैसे देने चाहे, पर रामू ने मुस्कराकर मना कर दिया। कुछ हफ़्तों बाद वही युवती मिठाई का डिब्बा लेकर उसे खोजती हुई आई; उसे नौकरी मिल गई थी। ईमानदारी का सुख किसी इनाम से बड़ा होता है। | शीर्षक; आकर्षक आरंभ; पात्र और देशकाल; द्वंद्व या समस्या; चरमोत्कर्ष; स्वाभाविक अंत और सीख; कुछ संवाद। |
| 19 | कबीर पहले तो रोमांचित हुआ, फिर उसे याद आया कि अनजान संदेशों का उत्तर देने से पहले सावधानी ज़रूरी है। उसने संदेश में दिए लिंक पर क्लिक नहीं किया और अपने बड़े भाई को बुलाया। भाई ने देखा तो बताया कि यह एक धोखाधड़ी वाला संदेश है, जो लोगों की निजी जानकारी चुराने के लिए भेजा जाता है। दोनों ने मिलकर संदेश को हटाया और कंप्यूटर की सुरक्षा जाँच की। अगले दिन कबीर ने अपनी कक्षा में इस घटना के बारे में बताया और सबको समझाया कि अनजान लिंक न खोलें और अपना पासवर्ड किसी से साझा न करें। शिक्षिका ने उसकी समझदारी की प्रशंसा की। कबीर ने जाना कि ऑनलाइन दुनिया में जिज्ञासा के साथ सावधानी भी ज़रूरी है। | आरंभ से जुड़ी घटनाएँ, पात्र का व्यवहार, समस्या का समाधान और अंत में सीख। |
| 20 | सोमवार, रात आठ बजे प्रिय डायरी, आज पहली बार अकेले बस से मौसी के घर जाना हुआ। माँ ने कई हिदायतें दीं और एक पर्ची पर पता और फ़ोन नंबर लिखकर दिया। बस में खिड़की वाली सीट मिली, तो रास्ते भर खेत, नदी और छोटे-छोटे गाँव देखने का आनंद मिला। बीच में एक बार स्टॉप का नाम सुनाई नहीं दिया और मन घबरा गया, पर कंडक्टर भैया से पूछ लिया और उन्होंने सही स्टॉप पर उतारा। मौसी बस अड्डे पर इंतज़ार कर रही थीं। आज लगा कि बड़े होने का अर्थ है ज़िम्मेदारी से काम करना और ज़रूरत पड़ने पर विनम्रता से मदद माँगना। मन में एक नया आत्मविश्वास है। | दिन और समय; ‘प्रिय डायरी’; घटना का वर्णन; अपनी भावनाएँ ईमानदारी से; अंत में कोई सीख या संकल्प; भाषा आत्मीय। |