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Practice that never repeats
CBSE · Class 12 · Hindi

अपठित गद्यांश

Standard difficulty · 20 questions · 40 marks · Time: 43 minutes

Name: Date: Score: ____ / 40

Write full answers in Sections B and C. Answers are on the last page — try every question first!

Section A — Choose the correct answer8 × 1 = 8 marks
1.
नीचे दिया गया अंश पढ़कर उत्तर दीजिए।

वास्तव में असफलता हमें वह सिखाती है जो सफलता कभी नहीं सिखा पाती। जब कोई प्रयास सफल होता है, तो हम प्रायः उसके कारणों पर विचार नहीं करते। पर असफलता हमें रुककर सोचने को विवश करती है कि कहाँ चूक हुई, कौन-सी तैयारी अधूरी थी और किस धारणा को बदलना चाहिए। इसी ईमानदार विश्लेषण से अगली बार का रास्ता निकलता है।

सफल होने पर हम प्रायः क्या नहीं करते?
  1. अगला लक्ष्य बनाना
  2. दूसरों को बताना
  3. उत्सव मनाना
  4. सफलता के कारणों पर विचार
2.
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ठहराव का अर्थ आलस नहीं है। इसका अर्थ है जो कर रहे हैं, उसे पूरे ध्यान से करना। भोजन करते समय केवल भोजन करना, मित्र से बात करते समय केवल उसकी बात सुनना और दिन में कुछ पल अपने साथ बिताना। जब हम हर काम को जल्दी निपटाने की जगह उसे जीना सीखते हैं, तो कम समय में भी अधिक संतोष मिलता है। जीवन एक दौड़ नहीं, एक यात्रा है जिसका आनंद रास्ते में ही है।

लेखक के अनुसार ठहराव का अर्थ क्या है?
  1. सारा काम छोड़ देना
  2. दिन भर सोते रहना
  3. जो कर रहे हैं, उसे पूरे ध्यान से करना
  4. किसी से बात न करना
3.
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विद्यालयों में खेल केवल पदक जीतने के लिए नहीं, चरित्र गढ़ने के लिए होने चाहिए। प्रशिक्षक यदि केवल परिणाम पर ध्यान दें, तो बच्चे हार से डरने लगते हैं और खेल का आनंद खो देते हैं। पर जब प्रयास, अनुशासन और ईमानदारी की प्रशंसा होती है, तो बच्चे सीखते हैं कि सच्ची जीत अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने में है, किसी दूसरे को नीचा दिखाने में नहीं।

लेखक के अनुसार विद्यालयों में खेल किसलिए होने चाहिए?
  1. चरित्र गढ़ने के लिए
  2. केवल परीक्षा के अंकों के लिए
  3. केवल प्रसिद्धि के लिए
  4. केवल समय बिताने के लिए
4.
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विद्यालयों में खेल केवल पदक जीतने के लिए नहीं, चरित्र गढ़ने के लिए होने चाहिए। प्रशिक्षक यदि केवल परिणाम पर ध्यान दें, तो बच्चे हार से डरने लगते हैं और खेल का आनंद खो देते हैं। पर जब प्रयास, अनुशासन और ईमानदारी की प्रशंसा होती है, तो बच्चे सीखते हैं कि सच्ची जीत अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने में है, किसी दूसरे को नीचा दिखाने में नहीं।

गद्यांश के अनुसार सच्ची जीत किसमें है?
  1. अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने में
  2. हर मैच जीतने में
  3. सबसे अधिक पदक पाने में
  4. प्रशिक्षक को ख़ुश करने में
5.
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हमारी शिक्षा और समाज, दोनों में असफलता को प्रायः कलंक की तरह देखा जाता है। परीक्षा में कम अंक आने या किसी प्रतियोगिता में पीछे रह जाने पर व्यक्ति स्वयं को हीन समझने लगता है। इस डर का परिणाम यह होता है कि बहुत-से लोग नया प्रयास करने से ही कतराने लगते हैं। वे वही करते हैं जिसमें असफल होने की आशंका कम हो, भले ही उसमें उनकी रुचि न हो।

असफलता के डर का क्या परिणाम होता है?
  1. लोग नया प्रयास करने से कतराने लगते हैं
  2. लोग अधिक साहसी हो जाते हैं
  3. लोग प्रतियोगिताओं में अधिक भाग लेते हैं
  4. लोग अपनी रुचि का काम चुनते हैं
6.
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धरती पर जीवन एक विशाल जाल की तरह बुना हुआ है। पेड़, कीट, पक्षी, मछलियाँ, सूक्ष्म जीव और मनुष्य, सब एक-दूसरे पर किसी न किसी रूप में निर्भर हैं। इस विविधता को ‘जैव विविधता’ कहा जाता है। जिस प्रकार किसी कपड़े से एक-एक धागा खींचते जाएँ तो वह धीरे-धीरे उधड़ जाता है, उसी प्रकार प्रजातियों के लुप्त होने से प्रकृति का यह ताना-बाना कमज़ोर पड़ने लगता है।

किसी एक प्रजाति का घटना अक्सर ऐसी शृंखला शुरू कर देता है जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। यदि किसी क्षेत्र में मेंढक कम हो जाएँ, तो कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है और वे फ़सलों को हानि पहुँचाते हैं। यदि गिद्ध घट जाएँ, तो मृत पशुओं के अवशेष खुले में सड़ते रहते हैं और बीमारियाँ फैलती हैं। प्रकृति में कोई भी जीव व्यर्थ नहीं है; हर एक की कोई न कोई भूमिका है।

जैव विविधता की रक्षा का सबसे प्रभावी उपाय जीवों के प्राकृतिक आवास को बचाना है। जंगल, घास के मैदान, आर्द्रभूमि और नदियाँ अनगिनत जीवों के घर हैं। इन्हें बचाने के लिए बड़े अभियानों के साथ-साथ स्थानीय प्रयास भी ज़रूरी हैं: अपने इलाक़े के तालाब को साफ़ रखना, देशी पौधे लगाना और पक्षियों के लिए पानी रखना। जो समाज प्रकृति को अपने परिवार का हिस्सा मानता है, वही लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है।

इस गद्यांश के लिए सबसे उपयुक्त शीर्षक है:
  1. भाषा: सोच की खिड़की
  2. जंगल में पिकनिक
  3. चिड़ियाघर की सैर
  4. जीवन का ताना-बाना
7.
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भूजल के घटने के परिणाम दूरगामी हैं। पानी का स्तर नीचे जाने से नलकूप गहरे करने पड़ते हैं, जिससे बिजली और धन दोनों अधिक ख़र्च होते हैं। कई स्थानों पर गहराई से निकलने वाले पानी में हानिकारक लवणों की मात्रा बढ़ जाती है। तटीय क्षेत्रों में समुद्र का खारा पानी भीतर घुसने लगता है, जिससे खेत और पीने का पानी दोनों प्रभावित होते हैं।

अंश में आए शब्द ‘लवण’ का अर्थ है:
  1. नमक जैसे पदार्थ
  2. काम में मन न लगने की अवस्था
  3. फटे कपड़े को धागे से बुनकर जोड़ना
  4. जिस पर रोक लगी हो
8.
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सत्य की परख के लिए किसी विशेष यंत्र की नहीं, कुछ आदतों की आवश्यकता है। कोई भी सूचना आगे भेजने से पहले उसका स्रोत देखें, विश्वसनीय समाचार माध्यमों से उसकी पुष्टि करें और यह सोचें कि वह हमें किसी विशेष भावना में बहाने की कोशिश तो नहीं कर रही। ठहरकर सोचना ही इस युग की सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। जो व्यक्ति संदेह करना और प्रमाण माँगना सीख लेता है, वह सूचना की बाढ़ में भी डूबता नहीं।

अंश में आए शब्द ‘विश्वसनीय’ का अर्थ है:
  1. मुक़ाबला करने वाला
  2. फटे कपड़े को धागे से बुनकर जोड़ना
  3. जिस पर भरोसा किया जा सके
  4. किसी बात को उसके भागों में बाँटकर गहराई से जाँचना
Section B — Short answer8 × 2 = 16 marks
9.
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धरती के नीचे जमा पानी सदियों में धीरे-धीरे भरता है, पर हम उसे कुछ ही दशकों में खाली करते जा रहे हैं। खेती, उद्योग और शहरों की बढ़ती माँग पूरी करने के लिए गहरे नलकूप लगातार पानी खींच रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी कुएँ साल भर भरे रहते थे, वहाँ अब गर्मियों में पानी के टैंकरों की प्रतीक्षा होती है। यह संकट धीरे आता है, इसलिए अक्सर दिखाई नहीं देता।

भूजल पर किन-किन क्षेत्रों की माँग का दबाव है?
10.
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मनुष्य सदा से आकाश को आश्चर्य से निहारता आया है। कभी तारों से दिशा पहचानी गई, कभी उनकी गति से ऋतुओं का अनुमान लगाया गया। आज वही जिज्ञासा उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के रूप में साकार हो रही है। कुछ लोग पूछते हैं कि जब धरती पर इतनी समस्याएँ हैं, तब अंतरिक्ष पर धन ख़र्च करना कहाँ तक उचित है।

मनुष्य की प्राचीन जिज्ञासा आज किस रूप में साकार हो रही है?
11.
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धरती के नीचे जमा पानी सदियों में धीरे-धीरे भरता है, पर हम उसे कुछ ही दशकों में खाली करते जा रहे हैं। खेती, उद्योग और शहरों की बढ़ती माँग पूरी करने के लिए गहरे नलकूप लगातार पानी खींच रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी कुएँ साल भर भरे रहते थे, वहाँ अब गर्मियों में पानी के टैंकरों की प्रतीक्षा होती है। यह संकट धीरे आता है, इसलिए अक्सर दिखाई नहीं देता।

अंश में से वह शब्द ढूँढकर लिखिए जिसका अर्थ है ‘सैकड़ों वर्षों’।
12.
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आज खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं रहे; वे एक बड़ा उद्योग बन चुके हैं। विज्ञापन, पुरस्कार राशि और प्रसिद्धि ने जीत को इतना महत्वपूर्ण बना दिया है कि कई बार खिलाड़ी किसी भी क़ीमत पर जीतना चाहते हैं। इस होड़ में नियमों को तोड़ने, विरोधी को अपमानित करने और प्रतिबंधित दवाओं के प्रयोग जैसी घटनाएँ भी सामने आती हैं।

अंश में से वह शब्द ढूँढकर लिखिए जिसका अर्थ है ‘जिस पर रोक लगी हो’।
13.
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इस बढ़ी हुई गर्मी का बोझ सबसे अधिक उन लोगों पर पड़ता है जो खुले में काम करते हैं या जिनके घर हवादार नहीं हैं। गर्मी बढ़ने से बिजली की माँग भी बढ़ती है, क्योंकि लोग ठंडक के लिए मशीनों पर निर्भर हो जाते हैं। ये मशीनें घर के भीतर ठंडक देती हैं, पर बाहर और अधिक गर्म हवा छोड़ती हैं। इस प्रकार एक दुष्चक्र बन जाता है जिसमें गर्मी और ऊर्जा की खपत एक-दूसरे को बढ़ाती रहती हैं।

अंश में से वह शब्द ढूँढकर लिखिए जिसका अर्थ है ‘ऐसा क्रम जिसमें बुराई बढ़ती ही जाए’।
14.
नीचे दिया गया अंश पढ़कर उत्तर दीजिए।

जैव विविधता की रक्षा का सबसे प्रभावी उपाय जीवों के प्राकृतिक आवास को बचाना है। जंगल, घास के मैदान, आर्द्रभूमि और नदियाँ अनगिनत जीवों के घर हैं। इन्हें बचाने के लिए बड़े अभियानों के साथ-साथ स्थानीय प्रयास भी ज़रूरी हैं: अपने इलाक़े के तालाब को साफ़ रखना, देशी पौधे लगाना और पक्षियों के लिए पानी रखना। जो समाज प्रकृति को अपने परिवार का हिस्सा मानता है, वही लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है।

अंश में आए शब्द ‘आवास’ का अर्थ लिखिए और उसे अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
15.
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खेल भावना का अर्थ है नियमों का ईमानदारी से पालन करना, विरोधी को सम्मान देना और परिणाम को गरिमा के साथ स्वीकार करना। जो खिलाड़ी गिरे हुए प्रतिद्वंद्वी को उठने में हाथ देता है या रेफ़री के निर्णय को शांति से मानता है, वह भले ही मैच हार जाए, दर्शकों का हृदय जीत लेता है। ऐसे क्षण स्कोरबोर्ड पर दर्ज नहीं होते, पर लोगों की स्मृति में सदा रहते हैं।

अंश में आए शब्द ‘गरिमा’ का अर्थ लिखिए और उसे अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
16.
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किंतु अंतरिक्ष की ओर बढ़ते कदमों के साथ एक नई चिंता भी जुड़ी है। धरती की कक्षा में पुराने उपग्रहों और रॉकेटों के हज़ारों टुकड़े तेज़ गति से घूम रहे हैं। ये ‘अंतरिक्ष कचरा’ सक्रिय उपग्रहों से टकराकर उन्हें नष्ट कर सकते हैं। जिस प्रकार हमने धरती पर कचरे की समस्या पैदा की, वही भूल अंतरिक्ष में न दोहराई जाए, इसके लिए सभी देशों को मिलकर नियम बनाने और उनका पालन करने की आवश्यकता है।

अंश में आए शब्द ‘सक्रिय’ का अर्थ लिखिए और उसे अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Section C — Longer answers4 × 4 = 16 marks
17.
नीचे दिया गया गद्यांश पढ़कर उत्तर दीजिए।

एक समय था जब सूचना पाना कठिन था और लोग समाचार के लिए दिन भर प्रतीक्षा करते थे। आज स्थिति उलटी है। हर क्षण हमारे फ़ोन पर संदेश, वीडियो और समाचार बरसते रहते हैं। समस्या अब सूचना की कमी नहीं, उसकी बाढ़ है। इस बाढ़ में सच्ची और झूठी बातें इस तरह घुल-मिल जाती हैं कि उन्हें अलग करना कठिन हो जाता है।

झूठी ख़बरें प्रायः सच से अधिक तेज़ी से फैलती हैं, क्योंकि वे हमारी भावनाओं को सीधे छूती हैं। कोई सनसनीखेज़ शीर्षक हमें चौंकाता है, डराता है या क्रोधित करता है, और हम बिना सोचे उसे आगे भेज देते हैं। हमें लगता है कि हम दूसरों को सावधान कर रहे हैं, पर वास्तव में हम अफ़वाह की शृंखला की एक कड़ी बन जाते हैं। कई बार ऐसी अफ़वाहें लोगों के बीच अविश्वास और भय फैला देती हैं।

सत्य की परख के लिए किसी विशेष यंत्र की नहीं, कुछ आदतों की आवश्यकता है। कोई भी सूचना आगे भेजने से पहले उसका स्रोत देखें, विश्वसनीय समाचार माध्यमों से उसकी पुष्टि करें और यह सोचें कि वह हमें किसी विशेष भावना में बहाने की कोशिश तो नहीं कर रही। ठहरकर सोचना ही इस युग की सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। जो व्यक्ति संदेह करना और प्रमाण माँगना सीख लेता है, वह सूचना की बाढ़ में भी डूबता नहीं।

(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (ख) गद्यांश का मूल भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए। (ग) सूचना के संबंध में पहले और आज की स्थिति में क्या अंतर है? (घ) ‘सनसनीखेज़’ शब्द का अर्थ लिखिए।
18.
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हमारे समाज में प्रायः कुछ कामों को बड़ा और कुछ को छोटा मान लिया जाता है। मेज़ पर बैठकर किया जाने वाला काम प्रतिष्ठित समझा जाता है, जबकि हाथ से किया जाने वाला काम उतना सम्मान नहीं पाता। पर यदि एक दिन के लिए भी सफ़ाई करने वाले, बिजली ठीक करने वाले या खेत में काम करने वाले लोग अपना काम रोक दें, तो पूरे शहर का जीवन ठप हो जाएगा।

श्रम का मूल्य उसके प्रकार से नहीं, उसकी ईमानदारी और उपयोगिता से आँका जाना चाहिए। एक कुशल बढ़ई जिस धैर्य और सूक्ष्मता से लकड़ी को आकार देता है, वह किसी कलाकार की साधना से कम नहीं। जब हम किसी काम को छोटा कहते हैं, तो अनजाने में उसे करने वाले व्यक्ति के आत्मसम्मान को भी चोट पहुँचाते हैं।

इस सोच को बदलने की शुरुआत घर और विद्यालय से हो सकती है। बच्चे यदि बचपन से अपने कपड़े धोना, पौधों की देखभाल करना और छोटी-मोटी मरम्मत करना सीखें, तो वे हर काम का सम्मान करना भी सीखेंगे। अपने आसपास काम करने वाले लोगों से विनम्रता से बात करना, उन्हें उचित पारिश्रमिक देना और उनका धन्यवाद करना छोटी बातें लगती हैं, पर इन्हीं से एक संवेदनशील समाज बनता है।

(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (ख) गद्यांश का मूल भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए। (ग) किसी काम को छोटा कहने से क्या हानि होती है? (घ) ‘आत्मसम्मान’ शब्द का अर्थ लिखिए।
19.
नीचे दिया गया गद्यांश पढ़कर उत्तर दीजिए।

मनुष्य सदा से आकाश को आश्चर्य से निहारता आया है। कभी तारों से दिशा पहचानी गई, कभी उनकी गति से ऋतुओं का अनुमान लगाया गया। आज वही जिज्ञासा उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के रूप में साकार हो रही है। कुछ लोग पूछते हैं कि जब धरती पर इतनी समस्याएँ हैं, तब अंतरिक्ष पर धन ख़र्च करना कहाँ तक उचित है।

इस प्रश्न का उत्तर हमारे दैनिक जीवन में ही छिपा है। मौसम की सटीक भविष्यवाणी, तूफ़ानों की पूर्व चेतावनी, दूरसंचार, रास्ता बताने वाली प्रणालियाँ और फ़सलों की निगरानी, सब उपग्रहों की देन हैं। तूफ़ान आने से पहले मछुआरों को समुद्र से लौटने की चेतावनी देकर उपग्रह अनगिनत जीवन बचाते हैं। इस प्रकार अंतरिक्ष अनुसंधान धरती से अलग नहीं, धरती के लिए ही है।

किंतु अंतरिक्ष की ओर बढ़ते कदमों के साथ एक नई चिंता भी जुड़ी है। धरती की कक्षा में पुराने उपग्रहों और रॉकेटों के हज़ारों टुकड़े तेज़ गति से घूम रहे हैं। ये ‘अंतरिक्ष कचरा’ सक्रिय उपग्रहों से टकराकर उन्हें नष्ट कर सकते हैं। जिस प्रकार हमने धरती पर कचरे की समस्या पैदा की, वही भूल अंतरिक्ष में न दोहराई जाए, इसके लिए सभी देशों को मिलकर नियम बनाने और उनका पालन करने की आवश्यकता है।

(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (ख) गद्यांश का मूल भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए। (ग) ‘अंतरिक्ष अनुसंधान धरती से अलग नहीं, धरती के लिए ही है’ — इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (घ) ‘निगरानी’ शब्द का अर्थ लिखिए।
20.
नीचे दिया गया गद्यांश पढ़कर उत्तर दीजिए।

भाषा को प्रायः केवल बातचीत का साधन माना जाता है, पर वह इससे कहीं अधिक है। हम जिस भाषा में सोचते हैं, वह हमारे देखने और समझने के ढंग को भी आकार देती है। किसी भाषा में बर्फ़ के लिए अनेक शब्द होते हैं, तो किसी में वर्षा के अलग-अलग रूपों के लिए। ये शब्द बताते हैं कि उस भाषा को बोलने वाले लोग अपने परिवेश को कितनी बारीकी से देखते रहे हैं।

हर भाषा अपने साथ लोकगीतों, कहावतों, कहानियों और ज्ञान का एक विशाल भंडार लिए चलती है। जब कोई भाषा बोलने वाले घटते जाते हैं, तो केवल शब्द नहीं खोते, बल्कि जीवन जीने का एक पूरा अनुभव लुप्त हो जाता है। जड़ी-बूटियों की पहचान, मौसम के संकेत और खेती की पारंपरिक विधियाँ कई बार केवल किसी स्थानीय भाषा में ही सुरक्षित रहती हैं।

अपनी मातृभाषा पर अधिकार रखते हुए दूसरी भाषाएँ सीखना मन की खिड़कियाँ खोलने जैसा है। हर नई भाषा हमें दुनिया को एक नए कोण से देखने का अवसर देती है। शोध बताते हैं कि एक से अधिक भाषाएँ जानने वाले बच्चे समस्याओं को कई तरीक़ों से सोच पाते हैं। इसलिए किसी भाषा को छोटा या बड़ा मानने के बजाय हर भाषा को सम्मान देना ही सच्ची शिक्षा है।

(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (ख) गद्यांश का मूल भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए। (ग) बर्फ़ और वर्षा के उदाहरण से लेखक क्या समझाना चाहता है? (घ) ‘पारंपरिक’ शब्द का अर्थ लिखिए।
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Answer key

अपठित गद्यांश · AW-12H-APG-2026-V1 · For parents — fold back or tear off before handing the sheet to your child.

QAnswerWorking
1(d) सफलता के कारणों पर विचारउत्तर अंश में दिया है; बाकी विकल्प अंश से मेल नहीं खाते।
2(c) जो कर रहे हैं, उसे पूरे ध्यान से करनाउत्तर अंश में दिया है; बाकी विकल्प अंश से मेल नहीं खाते।
3(a) चरित्र गढ़ने के लिएउत्तर अंश में दिया है; बाकी विकल्प अंश से मेल नहीं खाते।
4(a) अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने मेंउत्तर अंश में दिया है; बाकी विकल्प अंश से मेल नहीं खाते।
5(a) लोग नया प्रयास करने से कतराने लगते हैंउत्तर अंश में दिया है; बाकी विकल्प अंश से मेल नहीं खाते।
6(d) जीवन का ताना-बानाशीर्षक पूरे गद्यांश का विषय बताता है, किसी एक बात का नहीं।
7(a) नमक जैसे पदार्थलवण: नमक जैसे पदार्थ
8(c) जिस पर भरोसा किया जा सकेविश्वसनीय: जिस पर भरोसा किया जा सके
9खेती, उद्योग और शहरों की बढ़ती माँग का।उत्तर अंश पर आधारित हो, अपने शब्दों में।
10उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के रूप में।उत्तर अंश पर आधारित हो, अपने शब्दों में।
11सदियों—
12प्रतिबंधित—
13दुष्चक्र—
14आवास: रहने का स्थान। वाक्य अपना हो, जिसमें शब्द इसी अर्थ में आए।—
15गरिमा: मान-मर्यादा। वाक्य अपना हो, जिसमें शब्द इसी अर्थ में आए।—
16सक्रिय: काम करता हुआ। वाक्य अपना हो, जिसमें शब्द इसी अर्थ में आए।—
17(क) सूचना की बाढ़ और सत्य की परख (ख) सूचनाओं की बाढ़ में झूठी ख़बरें तेज़ी से फैलती हैं; स्रोत जाँचकर, ठहरकर और संतुलित ढंग से सोचकर ही हम सत्य तक पहुँच सकते हैं। (ग) पहले सूचना पाना कठिन था और लोग दिन भर प्रतीक्षा करते थे; आज हर क्षण सूचनाएँ बरसती रहती हैं। (घ) सनसनीखेज़: उत्तेजना और हलचल पैदा करने वालाशीर्षक छोटा हो और पूरे गद्यांश का विषय बताए; मूल भाव में सभी अनुच्छेदों की मुख्य बात आए; बाकी उत्तर गद्यांश पर आधारित हों।
18(क) श्रम की गरिमा (ख) हर प्रकार का ईमानदार श्रम सम्मान के योग्य है; हाथ के काम को छोटा समझने की सोच बदलनी होगी। (ग) उस काम को करने वाले व्यक्ति के आत्मसम्मान को चोट पहुँचती है। (घ) आत्मसम्मान: अपने प्रति आदर का भावशीर्षक छोटा हो और पूरे गद्यांश का विषय बताए; मूल भाव में सभी अनुच्छेदों की मुख्य बात आए; बाकी उत्तर गद्यांश पर आधारित हों।
19(क) अंतरिक्ष की ओर बढ़ते कदम (ख) अंतरिक्ष अन्वेषण केवल जिज्ञासा नहीं, धरती के जीवन को बेहतर बनाने का साधन भी है; इसके साथ अंतरिक्ष को स्वच्छ रखने की ज़िम्मेदारी भी जुड़ी है। (ग) उपग्रह मौसम की भविष्यवाणी, तूफ़ानों की चेतावनी, दूरसंचार, रास्ता बताने और फ़सलों की निगरानी में मदद करते हैं; इसका लाभ धरती के लोगों को ही मिलता है। (घ) निगरानी: देख-रेखशीर्षक छोटा हो और पूरे गद्यांश का विषय बताए; मूल भाव में सभी अनुच्छेदों की मुख्य बात आए; बाकी उत्तर गद्यांश पर आधारित हों।
20(क) भाषा: सोच की खिड़की (ख) भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, सोचने और संस्कृति को सहेजने का माध्यम है; मातृभाषा के साथ अन्य भाषाएँ सीखना मन को समृद्ध करता है। (ग) किसी भाषा के शब्द बताते हैं कि उसके बोलने वाले अपने परिवेश को कितनी बारीकी से देखते रहे हैं। (घ) पारंपरिक: परंपरा से चली आ रहीशीर्षक छोटा हो और पूरे गद्यांश का विषय बताए; मूल भाव में सभी अनुच्छेदों की मुख्य बात आए; बाकी उत्तर गद्यांश पर आधारित हों।