Standard difficulty · 20 questions · 40 marks · Time: 48 minutes
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मीडिया लेखन · AW-12H-MDL-2026-V1 · For parents — fold back or tear off before handing the sheet to your child.
| Q | Answer | Working |
|---|---|---|
| 1 | (c) उदय विद्या भवन की विज्ञान प्रदर्शनी में दिखे 111 मॉडल | शीर्षक छोटा, स्पष्ट और तथ्यपरक हो, जिसमें इसी समाचार की मुख्य घटना आए; राय या अस्पष्ट बात न हो। |
| 2 | (a) राजेंद्र नगर आवासीय कल्याण समिति के सदस्यों और स्थानीय विद्यार्थियों ने गुरुवार सुबह राजेंद्र नगर के पास नदी के किनारे 1100 पौधे लगाए। | मुखड़े में सबसे महत्वपूर्ण बात, यानी क्या, कौन, कब और कहाँ, आती है। |
| 3 | (b) सच कहें तो इससे अच्छा काम शायद ही कभी हुआ हो। | समाचार में लेखक की राय नहीं, केवल तथ्य होते हैं। |
| 4 | (c) साक्षात्कार | प्रश्न-उत्तर का रूप साक्षात्कार की पहचान है। |
| 5 | (c) साक्षात्कार | प्रश्न-उत्तर का रूप साक्षात्कार की पहचान है। |
| 6 | (b) रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष या तथ्य को सामने रखने वाला | — |
| 7 | (d) समाचार को भागों में बाँटकर पढ़ना आसान बनाना | — |
| 8 | (c) सटीक, भ्रामक या केवल क्लिक बटोरने वाला नहीं | — |
| 9 | नमूना: रोबोटिक्स प्रतियोगिता में नवज्योति विद्यालय की टीम प्रथम | शीर्षक छोटा, स्पष्ट और तथ्यपरक हो; मुख्य घटना और संख्या आए, राय न हो। |
| 10 | नमूना: रक्तदान शिविर में 208 यूनिट रक्त एकत्र | शीर्षक छोटा, स्पष्ट और तथ्यपरक हो; मुख्य घटना और संख्या आए, राय न हो। |
| 11 | नमूना: शनिवार शाम नगर स्टेडियम में खेले गए अंतर-विद्यालय फ़ुटबॉल प्रतियोगिता के फ़ाइनल में उदय विद्या भवन ने प्रगति विद्यालय को 4–2 से हराया। | एक-दो वाक्य, लगभग पच्चीस-तीस शब्द; चारों ककार आएँ। |
| 12 | नमूना: नागपुर के लगभग 1800 धावकों ने शुक्रवार सुबह छह बजे नगर स्टेडियम से झील के किनारे तक 5 किलोमीटर की ‘स्वस्थ शहर दौड़’ में भाग लिया। | एक-दो वाक्य, लगभग पच्चीस-तीस शब्द; चारों ककार आएँ। |
| 13 | नमूना: नगर अस्पताल में दिल की जाँच के लिए नई इकाई शुरू हो गई है। इसमें आधुनिक मशीनें लगी हैं। अब तक ऐसे मरीज़ों को जाँच के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता था। | हर वाक्य में एक बात; सरल शब्द; बड़ी संख्याएँ गोल रूप में। |
| 14 | नमूना: उसकी आँखें रास्ता नहीं देख सकतीं, पर उसके कदम हर सुबह ट्रैक की हर रेखा पहचानते हैं। रस्सी के एक सिरे पर वह है और दूसरे पर उसका साथी धावक। | आरंभ किसी सजीव दृश्य, प्रसंग या प्रश्न से हो, जिससे पाठक आगे पढ़ना चाहे। |
| 15 | (1) स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से बच्चे मैदान से दूर हो रहे हैं। (2) इससे मोटापा और कमज़ोर एकाग्रता जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। (3) विद्यालयों में रोज़ खेल का समय हो और मोहल्लों में सुरक्षित खेल के मैदान बचाए जाएँ। | समस्या, उसका प्रभाव और समाधान: तीनों पहलू आएँ; भाषा संतुलित हो। |
| 16 | क्या? निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर में 900 लोगों की जाँच हुई; कौन? नगर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम; कब? रविवार को; कहाँ? कमला कॉलोनी के सामुदायिक भवन में; क्यों? बुज़ुर्गों और बच्चों में बीमारियों की समय पर पहचान के लिए; कैसे? आँखों, दाँतों और रक्तचाप की जाँच की गई तथा ज़रूरत पड़ने पर दवाइयाँ दी गईं | छहों ककार, इसी घटना से जुड़े। |
| 17 | स्वयंसेवकों ने झील से निकाला 1450 किलो कचरा भुवनेश्वर, 14 सितंबर 2027। लगभग 320 स्वयंसेवकों ने मंगलवार सुबह शहर की पुरानी झील पर सफ़ाई अभियान चलाकर 1450 किलोग्राम कचरा निकाला। आयोजकों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य झील के पानी को साफ़ रखना और वहाँ आने वाले पक्षियों को बचाना है। स्वयंसेवकों ने दस्तानों और जालियों की मदद से किनारों और पानी से प्लास्टिक इकट्ठा किया। निकाले गए कचरे में सबसे अधिक प्लास्टिक की बोतलें थीं। अभियान हर महीने के पहले रविवार को दोहराया जाएगा। | शीर्षक; डेटलाइन; मुखड़े में क्या, कौन, कब, कहाँ; फिर क्यों और कैसे; अंत में कम महत्वपूर्ण जानकारी। लेखक की राय न हो। |
| 18 | भारी लकड़ी का दरवाज़ा खुलते ही बाहर का शोर पीछे छूट जाता है और पुरानी किताबों की गंध आपका स्वागत करती है। एक कोने में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते युवा नोट्स बना रहे हैं, तो दूसरी ओर एक बुज़ुर्ग चश्मा ठीक करते हुए अख़बार पढ़ रहे हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष हर पाठक को नाम से जानती हैं और मुस्कराकर सही किताब तक पहुँचा देती हैं। शनिवार की शाम बच्चों के कोने में कहानी-सत्र होता है, जहाँ नन्हे पाठक आँखें फैलाए कहानियाँ सुनते हैं। फ़ोन और इंटरनेट के इस दौर में भी यह शांत कमरा ज्ञान का ऐसा ठिकाना है जहाँ हर कोई बराबर है। | आकर्षक आरंभ, सजीव वर्णन, मानवीय पहलू, लोगों के कथन या अनुभव, प्रभावी अंत; भाषा सरस और कथात्मक। |
| 19 | मैदान कहाँ हैं? हमारे देश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, कमी है अवसरों और सुविधाओं की। शहरों में खाली ज़मीनों पर भवन खड़े हो गए हैं और बच्चों के खेलने के मैदान सिमटते जा रहे हैं। कई विद्यालयों में न तो खेल का मैदान है, न प्रशिक्षित खेल शिक्षक। परिणाम यह है कि अनेक प्रतिभाशाली बच्चे शुरुआत में ही पीछे छूट जाते हैं। हर मोहल्ले में खेल का स्थान सुरक्षित रखना, विद्यालयों के मैदान छुट्टी के दिन बच्चों के लिए खोलना और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र बनाना आवश्यक है। खेल केवल पदक का माध्यम नहीं, स्वस्थ और अनुशासित पीढ़ी की नींव हैं। | शीर्षक; विषय का परिचय; कारण और प्रभाव का विश्लेषण; समाधान या सुझाव; भाषा संतुलित, तर्कपूर्ण; लेखक का नाम नहीं। |
| 20 | कहाँ खेलें बच्चे? हमारे संवाददाता ने शहर के बारह मोहल्लों का दौरा करके यह जानने की कोशिश की कि बच्चों के खेलने के लिए कितने मैदान उपलब्ध हैं। सात मोहल्लों में एक भी खुला मैदान नहीं मिला; बच्चे गलियों और पार्किंग में खेलते दिखे, जहाँ वाहनों से दुर्घटना का ख़तरा रहता है। जिन विद्यालयों में मैदान हैं, उनमें से अधिकांश छुट्टी के दिन बंद रहते हैं। एक फ़ुटबॉल प्रशिक्षक ने बताया कि मैदान न होने के कारण कई प्रतिभाशाली बच्चे खेल छोड़ देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार खेल की कमी से बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। रिपोर्ट सुझाव देती है कि हर मोहल्ले में खेल का स्थान आरक्षित हो और विद्यालयों के मैदान छुट्टी के दिन बच्चों के लिए खोले जाएँ। | शीर्षक; छानबीन का दायरा; आँकड़े और तथ्य; संबंधित लोगों के कथन; कारण; सुझाव। (आँकड़े काल्पनिक हो सकते हैं, पर सुसंगत हों।) |